मेरठ: वैश्विक खेल सामग्री क्षेत्र का उभरता 'पावरहाउस', 2036 तक 11% हिस्सेदारी का लक्ष्य

मेरठ: वैश्विक खेल सामग्री क्षेत्र का उभरता 'पावरहाउस', 2036 तक 11% हिस्सेदारी का लक्ष्य

An Emerging Powerhouse

An Emerging 'Powerhouse' in the Global Sports Goods Sector

लखनऊ। An Emerging 'Powerhouse' in the Global Sports Goods Sector, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्लस्टर आधारित विकास और उद्योग प्रोत्साहन विजन के कारण मेरठ आज देश के स्पोर्ट्स इक्विपमेंट सेक्टर के एक अपराजेय केंद्र के रूप में उभर रहा है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि की है कि यदि मेरठ जैसे पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टरों को सही नीतिगत समर्थन और आधुनिक तकनीक मिले, तो भारत वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय नीतियों ने मेरठ के इस पारंपरिक हुनर को एक नई औद्योगिक पहचान दी है।

विशाल औद्योगिक आधार और योगी सरकार का प्रोत्साहन

मेरठ दशकों से खेल सामग्री का प्रमुख केंद्र रहा है, जहाँ वर्तमान में 250 से अधिक निर्यात इकाइयों के साथ 1,000 से अधिक घरेलू इकाइयां और लगभग 20,000 सूक्ष्म उत्पादन इकाइयां सक्रिय हैं। क्रिकेट बैट से लेकर बॉक्सिंग ग्लव्स तक, यहाँ के उत्पाद अपनी गुणवत्ता के लिए जाने जाते हैं। योगी सरकार ने इस पारंपरिक ताकत को आधुनिकता से जोड़ते हुए एमएसएमई (MSME) सेक्टर को वित्तीय सहायता, तकनीकी अपग्रेडेशन और बेहतर प्रशिक्षण से जोड़ा है, ताकि स्थानीय उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़ा हो सके।

लक्ष्य 2036: वैश्विक बाजार में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी की तैयारी

केंद्र सरकार के बजट 2026 में स्पोर्ट्स गुड्स सेक्टर के लिए 500 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधान ने मेरठ की इस मुहिम को नई गति दी है। वर्तमान में वैश्विक स्पोर्ट्स निर्यात में भारत की हिस्सेदारी मात्र 0.5 प्रतिशत है, जिसे साल 2036 तक बढ़ाकर 11 प्रतिशत (लगभग 8.1 बिलियन डॉलर) ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। हालांकि कच्चे माल की लागत और आयात शुल्क जैसी चुनौतियां बरकरार हैं, लेकिन प्रदेश सरकार सिंगल विंडो सिस्टम और निवेश अनुकूल माहौल के जरिए इन समस्याओं का समाधान कर रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स: नोएडा बनेगा 'गेम चेंजर'

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का नोएडा क्षेत्र मेरठ के स्पोर्ट्स क्लस्टर के लिए एक 'लॉजिस्टिक्स बैकबोन' साबित हो रहा है। जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ग्रेटर नोएडा का आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब निर्यात को न केवल तेज करेंगे, बल्कि किफायती भी बनाएंगे। इस बेहतर कनेक्टिविटी से ट्रांजिट समय और लागत में भारी कमी आएगी। आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 और संभावित ओलंपिक 2036 को ध्यान में रखते हुए, मेरठ और नोएडा की यह जुगलबंदी उत्तर प्रदेश को दुनिया के लिए एक प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग जोन बना रही है।